सृजन एवं विमर्श
प्रकाशित कृतियाँ, शोध एवं ऐतिहासिक अनुवाद
प्रकाशित कृतियाँ
काव्य संग्रह एवं सम्पादित ग्रंथ
poetry
मोहे तो मोरे कवित्त बनावत
जन्मभूमि, मातृभूमि, प्रकृति, समाज एवं प्रेम के विविध परिदृश्यों को शब्दाकार देतीं शताधिक कविताओं का अद्भुत संग्रह।
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बुंदेलखंड विश्वविद्यालय पाठ्यक्रम (8 पुस्तकें)
बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के पूर्व प्रभावी स्नातक एवं स्नातकोत्तर हिंदी पाठ्यक्रम हेतु आठ महत्वपूर्ण पुस्तकों का संपादन।
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सम्पादित — विश्वविद्यालय ग्रंथ
ऐतिहासिक दस्तावेज़ों का संकलन
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क्रौंच रश्मि एवं स्मारिकाएं
महाविद्यालय की वार्षिक पत्रिका "क्रौंच रश्मि" एवं विभिन्न शिक्षक संघ स्मारिकाओं का कुशल संपादन।
ऐतिहासिक शोध एवं गद्य
१८५७ क्रांति पर शोध एवं अप्रकाशित गद्य
1857 क्रांति
19वीं शताब्दी के भारतीय साहित्य में महारानी लक्ष्मीबाई और उनका शासन काल
19वीं शताब्दी के विदेशी एवं भारतीय विद्वानों द्वारा स्वयं देखा अथवा अन्य प्रत्यक्षदर्शियों से सुना महारानी के शासन काल एवं स्वातंत्र्य संघर्ष का विस्तृत वृतांत।
१८५७ क्रांति
१८५७ — अप्रकाशित नोट्स
क्षेत्रीय स्रोतों पर आधारित अध्ययन
झाँसी का इतिहास
झाँसी नगर के प्रथम निर्माणकर्ता: गिरी एवं पुरी नागा गुसाईं
झाँसी नगर की स्थापना और उसके प्रारंभिक विकास में गिरी एवं पुरी नागा गुसाईं के ऐतिहासिक योगदान का गहन शोध।
ऐतिहासिक अनुवाद
मराठी / बुन्देली ऐतिहासिक ग्रंथों के हिन्दी अनुवाद
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मराठी
माझा प्रवास (झाँसी वृत्तांत)
विष्णु भट्ट गोडशे द्वारा मराठी गद्य में लिखित 1857 की क्रांति का प्रत्यक्षदर्शी विवरण "माझा प्रवास" में निहित झाँसी का क्रांति पूर्व एवं उत्तर वृतांत नामक अध्यायों का मराठी भाषाभाषी मित्रों के सहयोग से सरल हिंदी गद्यानुवाद।
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मराठी
माझा प्रवास (झाँसी वृत्तांत)
विष्णु भट्ट गोडशे द्वारा मराठी गद्य में लिखित 1857 की क्रांति का प्रत्यक्षदर्शी विवरण "माझा प्रवास" में निहित झाँसी का क्रांति पूर्व एवं उत्तर वृतांत नामक अध्यायों का मराठी भाषाभाषी मित्रों के सहयोग से सरल हिंदी गद्यानुवाद।
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मराठी / बुन्देली
मराठी ऐतिहासिक ग्रंथ — अनुवाद
मूल से हिन्दी में अनुवादित अंश
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बुन्देली
झाँसी के रायसे
1857 की क्रांति के प्रत्यक्षदर्शी विद्वान कल्याण सिंह "कुड़रा" द्वारा 1858 में बुन्देली पद्य में रचित "झाँसी के रायसे" का सरल हिंदी गद्यानुवाद।
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बुन्देली
झाँसी के रायसे
1857 की क्रांति के प्रत्यक्षदर्शी विद्वान कल्याण सिंह "कुड़रा" द्वारा 1858 में बुन्देली पद्य में रचित "झाँसी के रायसे" का सरल हिंदी गद्यानुवाद।
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बुन्देली
लक्ष्मीबाई रासो
19वीं शताब्दी के समापन वर्ष में महारानी लक्ष्मीबाई के समकालीन झाँसी के गण्यमान नागरिकों से प्राप्त प्रामाणिक विवरण के आधार पर मदन मोहन द्विवेदी "मदनेश" द्वारा बुन्देली पद्य में रचित "लक्ष्मीबाई रासो" का सरल हिन्दी गद्यानुवाद।
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बुन्देली
लक्ष्मीबाई रासो
19वीं शताब्दी के समापन वर्ष में महारानी लक्ष्मीबाई के समकालीन झाँसी के गण्यमान नागरिकों से प्राप्त प्रामाणिक विवरण के आधार पर मदन मोहन द्विवेदी "मदनेश" द्वारा बुन्देली पद्य में रचित "लक्ष्मीबाई रासो" का सरल हिन्दी गद्यानुवाद।