'माझा प्रवास': झाँसी क्रांति का आँखों देखा हाल

विष्णु भट्ट गोडसे का वृत्तांत

1857 के महासंग्राम का सबसे प्रामाणिक भारतीय विवरण ''माझा प्रवास'' (मराठी) में मिलता है। इसके लेखक विष्णु भट्ट गोडसे युद्ध के दौरान झाँसी के किले में ही मौजूद थे। उन्होंने रानी लक्ष्मीबाई की दिनचर्या और युद्ध की भयावहता का सजीव चित्रण किया है।

गोडसे लिखते हैं कि रानी सुबह 4 बजे उठकर शस्त्र अभ्यास करती थीं। उन्होंने किले के पतन और अंग्रेजों द्वारा किए गए नरसंहार का जो वर्णन किया है, वह इतिहास का सबसे दुखद और सत्य अध्याय है।


ऐतिहासिक स्रोत:

  • "माझा प्रवास" - मूल मराठी ग्रंथ (विष्णु भट्ट गोडसे)।
  • भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद (ICHR) के दस्तावेज़।

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