राष्ट्रकवि का साहित्यिक तीर्थ
झाँसी जिले का चिरगाँव कस्बा हिंदी साहित्य के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। यह महान राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की जन्मस्थली है। महात्मा गांधी ने उन्हें ''राष्ट्रकवि'' की उपाधि दी थी। उनकी कृतियाँ जैसे ''साकेत'' और ''भारत-भारती'' आज भी राष्ट्रवाद की अलख जगाती हैं।
सांस्कृतिक विरासत
चिरगाँव का उनका निवास स्थान आज भी साहित्यिक गतिविधियों का केंद्र है। झाँसी क्षेत्र के लोक साहित्य और बोली का प्रभाव गुप्त जी की रचनाओं में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। यह स्थल झाँसी के गौरवशाली सांस्कृतिक पक्ष को दुनिया के सामने रखता है।
ऐतिहासिक स्रोत:
- हिंदी साहित्य का इतिहास - डॉ. नगेंद्र।
- स्थानीय साहित्य परिषद रिकॉर्ड।