कड़क बिजली और भवानी शंकर: झाँसी की ऐतिहासिक तोपें

तोपखाने का गौरव

झाँसी के किले की सुरक्षा में ''कड़क बिजली'' और ''भवानी शंकर'' तोपों का बड़ा योगदान था। कड़क बिजली तोप का संचालन मुख्य तोपची गुलाम गौस खान करते थे। जब यह तोप चलती थी, तो इसकी आवाज़ बादलों की कड़क जैसी होती थी।

3 अप्रैल 1858 को किले की रक्षा करते हुए गुलाम गौस खान और खुदा बख्श वीरगति को प्राप्त हुए। उनकी मज़ारें आज भी किले के भीतर मौजूद हैं।


ऐतिहासिक स्रोत:

  • "The Revolt in Central India" - ब्रिटिश सैन्य अभिलेख।
  • उत्तर प्रदेश राज्य अभिलेखागार के दस्तावेज़।

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