दामोदर राव: झाँसी के निर्वासित उत्तराधिकारी का संघर्ष

झाँसी का वैध उत्तराधिकारी

दामोदर राव (आनंद राव) झाँसी के महाराजा गंगाधर राव के दत्तक पुत्र थे। लॉर्ड डलहौजी ने ''हड़प नीति'' के तहत उनके उत्तराधिकार को अमान्य कर दिया था। 1858 के युद्ध के दौरान वे अपनी वीर माता की पीठ पर बँधे हुए युद्ध भूमि में मौजूद थे।

निर्वासन और गरीबी

रानी के बलिदान के पश्चात, दामोदर राव कई वर्षों तक जंगलों में भटकते रहे। अंततः उन्होंने इंदौर में ब्रिटिश सरकार के सामने आत्मसमर्पण किया। अंग्रेजों ने उन्हें मात्र 150 रुपये मासिक पेंशन देकर इंदौर में नजरबंद कर दिया। उनका शेष जीवन अत्यंत सादगी और संघर्ष में बीता।


ऐतिहासिक स्रोत:

  • दामोदर राव के संस्मरण (Marathi Memoirs) - निजी जीवन के कष्टों का वर्णन।
  • Central India Agency Records - ब्रिटिश सरकार के आधिकारिक दस्तावेज़।

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